कारीगरों पर पड़ा भोजन का असर तो देख लिया गांव की राह

कारीगरों पर पड़ा भोजन का असर तो देख लिया गांव की राह

 

 रानू  पाण्डेय

खानपुर।रसोई गैस के संकट ने बाहर कमाने गए कामगारों के सामने भोजन का तो संकट खड़ा ही कर दिया था अब उनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट है। रसोई गैस की किल्लत से भोजन तैयार करने में दिक्कत बढ़ी तो अपने घर लौटना ही बेहतर समझा। हालात सामान्य होने पर ही वापसी का प्लान है।क्षेत्र के मौधा गांव निवासी संजय छह माह पूर्व घर की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद लेकर मुंबई गया था। वही एक दुकान पर डोसा बनाने का काम कर रहा था। संजय के मुताबिक वहां रसोई गैस की बहुत परेशानी है। लंबी लाइन लगाने के बावजूद नहीं मिल पा रही थी। किसी प्रकार इधर-उधर भोजन कर दिन काटा लेकिन जब नहीं रहा गया तो घर वापस आना बेहतर समझा।यहां आने से काम भी छूट गया है इससे और दिक्कत बढ़ गई है। मौधा निवासी ओमप्रकाश यादव का कहना है कि वह दिल्ली में मोबाइल का काम कर रहे थे। कई लोग साथ थे। मिल कर भोजन तैयार होता था। तीन दिन गैस नहीं मिली तो भोजन नहीं बन पा रहा था। रसोई गैस का संकट कब खत्म होता और मिलती पता नहीं था इससे घर वापस आ गया। कहा कि परिवार की स्थित बेहतर नहीं है इससे अधिक उम्र होने के बावजूद कुछ लोगों के साथ काम करने गया था। अब वापसी मुश्किल है।