बांसुरी' सिखाएगी बच्चों को गीत-संगीत और नृत्य की कला
रानू पाण्डेय
खानपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा चार के विद्यार्थियों की रचनात्मकता को नई दिशा देने के लिए सैदपुर में बांसुरी कला पुस्तिका लागू की जा रही है। इस पहल के तहत पहली बार छात्रों को कला विषय की अलग पुस्तक उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे चित्रकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच जैसी विधाओं को व्यवस्थित रूप से सीख सकेंगे। अब तक प्राथमिक विद्यालयों में कला शिक्षा बिना किसी विशेष पुस्तक के दी जाती थी लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सैदपुर के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को अब किताब के साथ-साथ व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर मिलेगा। बांसुरी पुस्तिका में बच्चों के लिए चित्र बनाने, कागज से आकृतियां तैयार करने, मिट्टी से मॉडल बनाने, गीत-संगीत सीखने और समूह में प्रस्तुति देने जैसी गतिविधियां शामिल की गई हैं। इसके माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, सृजनात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता का विकास किया जाएगा। पुस्तक में संगीत और नृत्य को भी विशेष महत्व दिया गया है। बच्चों को विभिन्न भाषाओं के गीत, ताल-लय की समझ और मंच पर प्रस्तुति देने का अभ्यास कराया जाएगा, जिससे उनकी छिपी प्रतिभाओं को निखारने में मदद मिलेगी।




