विकास कार्यों में भारी धांधली कर सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने गांव में किया प्रदर्शन
सैदपुर : देवकली ब्लॉक के विशुनपुरा गांव में कराए गए विकास कार्यों में भारी धांधली कर सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने गांव में प्रदर्शन किया और प्रधान व सचिव के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि गांव में वर्तमान पंचायती कार्यकाल में कागजों में बहुत काम हुआ है लेकिन धरातल पर वो कार्य नजर नहीं आ रहे। कागजों में काम दर्शाकर धन उतार लिया गया है। प्रदर्शन करने में शामिल गांव निवासी समाजसेवी व नारायणी सेना सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष अजीत यादव ने सूचना का अधिकार के तहत 5 वर्ष में हुए विभिन्न योजनाओं के तहत हुए कार्यों का ब्योरा मांगा था और करीब 2 माह में भी जवाब न मिलने पर एसडीएम से शिकायत की थी। गांव निवासी अजीत यादव ने बताया कि आधिकारिक ऐप पर चेक करने पर पता चला कि गांव में पिछले 5 वर्षों में करीब 65 से 70 लाख रुपये का काम हुआ है लेकिन मौके पर बहुत ही कम काम हुए दिखाई दे रहे हैं। जिससे स्पष्ट है कि काम सिर्फ कागजों में हुआ है और कागजों में ही कार्य पूर्ण दिखाकर सरकारी धन उतार लिया गया है। बताया कि एक दिन ऐसे ही मैं ऐप देख रहा था गांव में पूर्ण हुए कार्यों की सूची देखकर चौंक गया। उसमें अधिकांश ऐसे काम थे जो मौके पर हुए ही नहीं थे। इसीलिए मैंनेफरवरी में आरटीआई लगाकर अब तक किये गए कार्यों का ब्यौरा मांगा लेकिन 2 माह हुए लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला। कुछ कहने पर दबाव डलवाया जाता है कहा जाता है कि 5 साल का डेटा है तो अभी भी 2 माह और लगेंगे। बताया कि गांव में पेयजल के प्रबंध के लिए 1 लाख 34 हजार की लागत से मशीन लगाई गई है जबकि कहीं भी वो मौजूद ही नहीं है। इसके अलावा गांव की पोखरी के सुंदरीकरण के नाम पर कुछ पैसा उतारा गया। जबकि मौके पर पोखरी की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता कि पोखरी का सुंदरीकरण तो दूर, कभी सफाई तक की गई होगी। पोखरी में इतनी बड़ी सरपत उगी थी व हर तरफ जलकुंभी थी। किनारे भी झाड़ियों से घिरे थे। इसके अलावा एक जगह हैंडपंप का रिबोर दिखाकर धन उतारा गया है, जबकि मौके पर निजी नई बोरिंग कराई गयी है। कुछ ऐसे जगह रिबोर दिखाए गए हैं, जहां हैंडपंप ही नहीं हैं। इसके अलावा गांव से स्कूल जाने वाले रास्ते पर पटरी दिखाया गया है लेकिन मौके पर सिर्फ मिट्टी फेंककर कोरम पूरा किया गया है। स्कूल के ही बगल में सफाई के अभाव में ऊंचे घास व झाड़ियां उगने की बात कही। आरोप लगाया कि सफाईकर्मी गांव में कभी नहीं आते। वो प्रधान के घर जाते हैं और वहीं से घर चले जाते हैं। बताया कि स्कूल के शौचालय तक को नियमित साफ करने के लिए सफाईकर्मी नहीं आते। जिसके कारण उसी स्कूल की एक शिक्षामित्र के पुत्र समाजसेवा के तौर पर सफाई कर देते हैं। बताया कि गांव में बहुत सी नालियों का निर्माण दिखाया गया है लेकिन मौके पर अधिकांश नालियां मिलेंगी ही नहीं। बताया कि 2-3 माह पूर्व की बनी बिना गुणवत्ता वाली इंटरलॉकिंग सड़क धंस चुकी है। बताया कि इन्हीं खामियों को देखकर आरटीआई आवेदन में मैंने वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान ग्राम पंचायत में मनरेगा, आवास, सड़क, नलकूप/हैंडपंप समेत अन्य विकास कार्यों की पूरी जानकारी, कार्यवार स्वीकृत धनराशि, खर्च का विवरण, ठेकेदार/कार्यदायी संस्था का नाम, मस्टर रोल, वाउचर, बिल, कैशबुक और बैंक स्टेटमेंट की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा मनरेगा के तहत जारी जॉब कार्ड, मजदूरों को किए गए भुगतान का विवरण तथा ग्राम पंचायत को केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान की मदवार जानकारी भी मांगी गई है। साथ ही अधूरे कार्यों की स्थिति और उनके लंबित रहने के कारणों का भी विवरण देने को कहा गया है। लेकिन अब तक नहीं मिला। सभी ने समवेत स्वर में विकास कार्यों के जांच की मांग की है। इस मौके पर गोविन्द यादव, पारस यादव, भोला यादव, बनारसी यादव, अनुज यादव, अर्जुन गोंड, अंकित यादव, छोटू यादव, दीपक यादव आदि रहे।




