खानपुर: गंगा-गोमती की रेती पर लहलहाई खेती, किसानों के लिए बनी कमाई का नया जरिया

खानपुर: गंगा-गोमती की रेती पर लहलहाई खेती, किसानों के लिए बनी कमाई का नया जरिया

 

खानपुर। गंगा और गोमती नदियों के किनारे फैली रेतीली जमीन अब क्षेत्रीय किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। कभी बाढ़ और कटान से परेशान रहने वाले तटवर्ती इलाकों के लोग अब नदी किनारे उभरने वाले रेत के टीलों पर खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।पानी घटने के बाद नदी के बीच और किनारों पर खाली हुई रेतीली भूमि पर किसानों ने मौसमी सब्जियों और फलों की खेती शुरू कर दी है। इन खेतों में ककड़ी, खीरा, तरबूज, खरबूजा, लौकी, करेला, कद्दू, परवल, टमाटर, प्याज समेत कई फसलें तेजी से तैयार हो रही हैं। आसपास के बाजारों में इन उपजों की अच्छी मांग होने से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।गौरहट, गौरी, अमेहता, रजवाड़ी, खरौना, पटना, औड़िहार और सैदपुर क्षेत्र के अनेक किसान परिवार सहित सुबह से शाम तक खेती में जुटे हैं। किसान बताते हैं कि रेतीली मिट्टी में फसल जल्दी तैयार होती है और लागत भी अपेक्षाकृत कम लगती है। रेत के नीचे मौजूद नमी और पास के जल स्रोतों से सिंचाई आसान हो जाती है।कृषि जानकारों का कहना है कि नदी की रेती पर उगाई जाने वाली सब्जियां स्वाद और गुणवत्ता में बेहतर होती हैं, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान भी इस खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।जो नदियां कभी लोगों के लिए मुसीबत मानी जाती थीं, वही अब मेहनतकश किसानों के लिए खुशहाली का माध्यम बनती नजर आ रही हैं।