अधिकमास की वजह से विवाह के शुभ मुहूर्त बेहद सीमित, मई के बाद लगेगा लंबा विराम
रानू पाण्डेय की रिपोर्ट
खानपुर। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष विवाह योग्य परिवारों के लिए खुशियों के अवसर कम रहने वाले हैं। विक्रम संवत 2083 में पड़ने वाले 'अधिकमास' (मलमास) के कारण आगामी महीनों में मांगलिक कार्यों पर लंबे समय तक रोक लगी रहेगी। मई के बाद थम जाएगी शहनाइयों की गूंज ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, मई महीने में विवाह के अंतिम शुभ मुहूर्त 13 और 14 मई को हैं। इसके बाद, 17 मई से 15 जून तक अधिकमास' (मलमास) शुरू हो जाएगा। हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है; इसे भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है, लेकिन इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। जून से दिसंबर तक केवल 10 दिन का अवसरअधिक मास समाप्त होने के बाद, 19 जून से 8 जुलाई के बीच विवाह के कुछ सीमित मुहूर्त मिलेंगे। हालांकि, इसके तुरंत बाद फिर से विराम लग जाएगा। 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहने के कारण संस्कार नहीं हो सकेंगे, और फिर 25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरि शयन काल (चातुर्मास) रहेगा। विवाह समारोहों की फिर से शुरुआत 24 नवंबर के बाद ही हो पाएगी।पंडित शुभम पाण्डेय ने बताया कि मुहूर्त सीमित होने के कारण परिवारों ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं ताकि उपलब्ध तिथियों का लाभ उठाया जा सके।
वर्ष 2026 (संवत 2083) के प्रमुख विवाह मुहूर्त:
मई: 13, 14
जून: 19, 22, 27, 28, 29
जुलाई: 7, 8
नवंबर: 24, 25, 29




