तीसरे दिन सत्संग में भाव विभोर हुए श्रद्धालु

तीसरे दिन सत्संग में भाव विभोर हुए श्रद्धालु


रानू पाण्डेय
खानपुर।परसनी स्थित श्री ठाकुर जी प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास स्वामी श्री विजयानंद गिरी ने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।कथा व्यास ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है। इस अवसर पर रामतेज पाण्डेय,विवेक,जुगनू,रुकमेश नारायण,प्रमोद कुमार पाण्डेय,केसराज सिंह,चंद्रशेखर मिश्रा,अखिलेश दुबे,रमाकांत त्रिपाठी, अजीत,मनोज सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।