मनुष्य में अशांति का मुख्य कारण  कामनाएं 

मनुष्य में अशांति का मुख्य कारण  कामनाएं 

रानू पाण्डेय
खानपुर।क्षेत्र के परसनी स्थित श्री ठाकुर जी महाराज प्रांगण में विंध्याचल ग्रुप एंड कंपनी के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय दुर्लभ सत्संग महोत्सव का चौथा दिन श्रद्धा और भक्ति में सराबोर रहा। जहां कथा श्रवण के लिए परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान जहां एक ओर भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां गूंजती रहीं, वहीं ऋषिकेश से आए स्वामी विजयानंद गिरि महाराज के दिव्य प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाते हुए आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण कर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में अशांति का मुख्य कारण उसकी कामनाएं हैं। कामना का सामान्य अर्थ है मेरे मन की हो जाए, अर्थात यह होना चाहिए और यह नहीं होना चाहिए। जब व्यक्ति अपनी अपेक्षाओं और इच्छाओं के अनुसार जीवन की परिस्थितियों को ढालना चाहता है, तभी दुख और असंतोष जन्म लेता है। कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। इस मौके पर आयोजक व समाजसेवी मनोज सिंह, डॉ पीएन सिंह, रामतेज पाण्डेय आदि रहे।