सूफ़ी संत के उर्स में उमड़ी अकीदतों की भीड़
गगन बरनवाल/रानू पाण्डेय
सैदपुर : तहसील क्षेत्र के बहेरी गांव स्थित प्रसिद्ध सूफ़ी संत हज़रत शाह मंज़ूर आलम (हुज़ूर साहब) के दशवे उर्स पर मंगलवार शाम व बुधवार सुबह को उनके आस्ताने पर अकीदमंतों की भीड़ उमड़ पड़ी। हज़रत शाह मंज़ूर आलम चिश्तिया सिलसिले के रूहानी बुजुर्ग थे। उनकी खानकाह कानपुर में है। वह मूलत: बहेरी के रहने वाले थे। उनके हयात में रहते तमाम चमत्कारों की घटनाएं हुईं थीं और ये सिलसिला आज भी जारी है। इनके मुरीद देशभर में और विभिन्न संप्रदायों के हैं पर उनकी निष्ठा अपने पीर के प्रति बेशुमार है।
उर्स के तहत मंगलवार को हज़रत शाह मंज़ूर आलम के आस्ताने पर गूसल की रस्म हुई। ख़्वाजा गरीब नवाज़ हज़रत मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अल्लैह, अज़मेर से प्रति वर्ष आने वाले चौधरी मुशर्रफ साहब और हज़रत मासूम अली खान की अगुवाई में सारी धार्मिक रस्में कराई गईं। हज़रत शाह मंज़ूर आलम साहब के लिए ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज के अलावा हज़रत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुलाह अलैह दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह दिल्ली की तरफ से भी चादर पेश की गई। चादर पोशी के बाद हुज़ूर साहब की खानकाह के शाही कौव्वाल ने हुज़ूर साहब के लिखे कलाम पेश किए। देश के विभिन्न भागों से आए कौव्वालों ने भी सूफ़ी कलामों के अपने नजराने पेश किए। कौव्वाली का दौर देर रात तक चलता रहा। सुबह से शाम तक सूफ़ी अध्यात्म में रुचि रखने वाले अकीदतमंदों की भीड़ लगी रही। इसी क्रम में बुधवार को बेलहरी में हजरत गूदर शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का उर्स भीं आयोजित हुआ।




